
काल कृत दोष (Kaal Krit Dosh) — बिना सहारे के भारी कर्म और जिम्मेदारियाँ
Dec 19, 2025
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काल कृत दोष वैदिक ज्योतिष का एक गहरा और गंभीर दोष माना जाता है।यह दोष तब बनता है जब व्यक्ति अपने जीवन में निरंतर जिम्मेदारियाँ तो उठाता है,लेकिन सहयोग, सराहना या भावनात्मक सहारा नहीं मिलता।
ऐसे लोग अक्सर कहते हैं:“मैं सबके लिए करता/करती हूँ, पर मेरे लिए कोई नहीं।”“मेहनत मेरी, फल किसी और को।”“जिम्मेदारी बहुत है, राहत नहीं।”
काल कृत दोष क्या है?
काल कृत दोष पूर्व जन्म के अपूर्ण कर्मों और ऋणों का संकेत है।यह दोष दर्शाता है कि आत्मा ने किसी जीवन में
कर्तव्य अधूरा छोड़ा
जिम्मेदारी से पलायन किया
किसी पर निर्भर रहकर कर्म टाले
और इस जन्म में वही कर्म अधिक भार बनकर लौटते हैं।
कुंडली में काल कृत दोष कैसे बनता है?
काल कृत दोष सामान्यतः इन स्थितियों में सक्रिय होता है:
शनि का 6वें, 8वें या 12वें भाव से गहरा संबंध
शनि पर राहु/केतु की दृष्टि या युति
दशम भाव (कर्म) और चतुर्थ भाव (सुख) पर शनि का कठोर प्रभाव
चंद्रमा पर शनि की पीड़ा (भावनात्मक अकेलापन)
यह दोष जन्म कुंडली के साथ-साथ दशा, अंतर्दशा और गोचर में भी उभर सकता है।
