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काल पुरुष ज्योतिष (Kaal Purush Astrology): कुंडली का ब्रह्मांडीय ढांचा

Jan 4

2 min read

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Kaal Purush reveals where your karma is stuck — not just why
Kaal Purush reveals where your karma is stuck — not just why

काल पुरुष क्या है? (What is Kaal Purush Astrology)


काल पुरुष ज्योतिष वैदिक ज्योतिष का वह मूल आधार है, जिसमें समय (काल) और ब्रह्मांडीय चेतना (पुरुष) को एक दिव्य शरीर के रूप में देखा जाता है। इस दिव्य शरीर के 12 अंग = 12 भाव, और 12 राशियाँ उसकी ऊर्जा-धाराएँ हैं।यानी—आपकी जन्म कुंडली केवल ग्रहों का नक्शा नहीं, बल्कि काल पुरुष के शरीर पर आपकी आत्मा की स्थिति को दर्शाती है।


काल पुरुष कुंडली की रचना


काल पुरुष कुंडली में मेष लग्न से शुरुआत मानी जाती है।यहाँ हर भाव, शरीर के एक अंग से जुड़ा है:

भाव

राशि

काल पुरुष का अंग

जीवन क्षेत्र

1

मेष

मस्तक

आत्म-चेतना, पहचान

2

वृषभ

मुख

वाणी, परिवार, धन

3

मिथुन

भुजाएँ

साहस, संवाद

4

कर्क

हृदय

भावनाएँ, माता, घर

5

सिंह

आमाशय

बुद्धि, संतान, सृजन

6

कन्या

नाभि

रोग, सेवा, ऋण

7

तुला

कमर

संबंध, विवाह

8

वृश्चिक

गुप्तांग

ट्रॉमा, परिवर्तन

9

धनु

जंघा

भाग्य, धर्म

10

मकर

घुटने

कर्म, करियर

11

कुंभ

पिंडली

लाभ, नेटवर्क

12

मीन

चरण

मोक्ष, त्याग

व्यक्तिगत कुंडली में काल पुरुष का उपयोग


जब आपकी जन्म कुंडली में किसी भाव/राशि पर ग्रह सक्रिय होते हैं, तो वह काल पुरुष के उसी अंग पर कर्मिक दबाव दिखाता है।


उदाहरण

  • 7वें भाव में पीड़ा → काल पुरुष की कमर  प्रभावित → रिश्तों में असंतुलन

  • 10वें भाव में बाधा → घुटने  प्रभावित → करियर में रुकावट

  • 12वें भाव में ग्रह → चरण  प्रभावित → त्याग, अकेलापन, आध्यात्मिक बुलावा


क्यों दो लोगों की दशा एक जैसी होकर भी परिणाम अलग होते हैं?


क्योंकि काल पुरुष मैपिंग अलग होती है।एक ही ग्रह-दशा:

  • किसी के लिए हृदय (4th) पर काम करती है → भावनात्मक मुद्दे

  • किसी के लिए घुटने (10th) पर → करियर दबाव

यहीं से समझ आता है कि समस्या कहाँ “लग” रही है—मन, संबंध, शरीर या कर्म।


काल पुरुष और दशा–गोचर का संबंध


  • दशा: कौन-सा अध्याय चल रहा है

  • गोचर: वह अध्याय कहाँ दबाव बना रहा है

  • काल पुरुष: वह दबाव शरीर/जीवन के किस हिस्से पर पड़ रहा है

इसी त्रिकोण से सटीक टाइमिंग + सही उपचार निकलता है।


काल पुरुष और चक्र (Chakra) कनेक्शन

भाव

चक्र

1–2

मूलाधार

3–4

स्वाधिष्ठान

5–6

मणिपुर

7–8

अनाहत

9–10

विशुद्ध

11

आज्ञा

12

सहस्रार

इसलिए, कई बार कुंडली की समस्या ऊर्जा असंतुलन बनकर शरीर/मन में दिखती है।


काल पुरुष आधारित उपाय क्यों प्रभावी होते हैं?

क्योंकि ये रूट लेवल पर काम करते हैं—

  • समस्या का स्थान (भाव/अंग)

  • समस्या का कारण (कर्म/दशा)

  • समाधान का माध्यम (मंत्र, यंत्र, चक्र, साधना)

यही कारण है कि काल पुरुष समझ के साथ किए गए उपाय तेज़ और स्थायी होते हैं।


निष्कर्ष

काल पुरुष ज्योतिष सिखाता है कि:

  • समस्या “क्यों” नहीं, पहले “कहाँ” है

  • हर पीड़ा एक कर्मिक संदेश है

  • सही समझ से ही सही उपचार संभव है


जब कुंडली को काल पुरुष के दृष्टिकोण से पढ़ा जाता है,तब ज्योतिष भविष्यवाणी नहीं, मार्गदर्शन बन जाता है।


आचार्या मनीषा अग्रवालवैदिक ज्योतिषी | कर्मिक विश्लेषक | ऊर्जा एवं यंत्र साधिका www.numerojyotish.in


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