
धनतेरस 2025 – धन, आरोग्य और समृद्धि का दिव्य रहस्य By Jyotish Acharya Manisha Agarwal
Oct 17, 2025
2 min read
1
96

(Dhanteras – When Jupiter and Venus Bless with Abundance)
धनतेरस का दिन दीपावली की शुरुआत का प्रतीक है —यह केवल खरीदारी का दिन नहीं, बल्कि धन, स्वास्थ्य और शुभ ग्रहों के आह्वान का अवसर है।
ज्योतिषीय महत्व
धनतेरस का संबंध गुरु (बृहस्पति) और शुक्र ग्रह से माना जाता है।जहाँ गुरु ज्ञान, विस्तार और धन का प्रतीक है, वहीं शुक्र ऐश्वर्य, सौंदर्य और भौतिक सुखों का प्रतिनिधि है।इस दिन इन दोनों ग्रहों की ऊर्जा सबसे अधिक सक्रिय होती है।
अगर सही विधि से पूजन और ग्रह संतुलन के उपाय किए जाएँ,तो यह दिन जीवन में धन प्रवाह, स्थायित्व और स्वास्थ्य लाने वाला बन सकता है।
पौराणिक कथा
कहानी के अनुसार, इस दिन समुद्र मंथ न से भगवान *धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।इसलिए इस दिन को आरोग्य और दीर्घायु के लिए भी श्रेष्ठ माना गया है।
एक अन्य कथा के अनुसार, राजा हिमा के पुत्र की मृत्यु भविष्यवाणी के अनुसार चौदह वर्ष की आयु में सांप के काटने से होनी थी।परन्तु धनतेरस की रात उसकी पत्नी ने दीपक जलाकर और सोने-चाँदी के गहनों को सजा कर यमराज का स्वागत किया।यमराज उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उसके पति का जीवन सुरक्षित हो गया।तभी से इस दिन दीपदान का विशेष महत्व है।
धनतेरस पूजन विधि
समय: सायंकाल के समय प्रदोष काल में पूजन सर्वोत्तम है।
पूजन देवता:
भगवान धन्वंतरि
श्रीकुबेर
माता लक्ष्मी
सामग्री: दीपक, कुमकुम, चावल, पुष्प, तुलसी पत्र, घी, सुपारी, और मिठाई।
